अमर शहीद भगत सिंह की आखिरी चिट्ठी - AR NEWS HINDI
शहीद भगत सिंह ने फांसी से एक दिन पहले 22 मार्च 1931 को अपने साथियों के नाम अंतिम पत्र लिखा था ! यह पत्र लाहौर से प्रकाशित अंग्रेजी 'द ट्रिब्यून' में छपा था ! इस पत्र का एक-एक शब्द उनकी बहादुरी और देशप्रेम को दर्शाता है !
साथियों,
स्वाभाविक है कि जीने की इच्छा मुझमें भी होनी चाहिए, मैं इसे छिपाना नहीं चाहता ! लेकिन मैं एक शर्त पर जिंदा रह सकता हूं कि मैं कैद होकर या पाबंद होकर जीना नहीं चाहता !
मेरा नाम हिंदुस्तानी क्रांति का प्रतीक बन चुका है और क्रांतिकारी दल के आदर्शो और कुर्बानियों ने मुझे बहुत ऊंचा उठा दिया है-इतना ऊंचा कि जीवित रहने की स्थिति में इससे ऊंचा मैं हरगिज नहीं हो सकता !
आज मेरी कमजोरियां जनता के सामने नहीं हैं ! अगर मैं फांसी से बच गया तो वो जाहिर हो जाएंगी और क्रांति का प्रतीक चिह्न मद्धिम पड़ जाएगा या संभवत: मिट ही जाए ! लेकिन दिलेराना ढंग से हंसते-हंसते मेरे फांसी चढ़ने की सूरत में हिंदुस्तान की माताएं अपने बच्चों के भगत सिंह बनने की आरजू किया करेंगी और देश की आजादी के लिए कुर्बानी देने वालों की तादाद इतनी बढ़ जाएगी कि क्रांति को रोकना साम्राज्यवाद या तमाम शैतानी शक्तियों के बूते की बात नहीं रहेगी !
हां, एक विचार आज भी मेरे मन में आता है कि देश और मानवता के लिए जो कुछ करने की हसरतें मेरे दिल में थी, उनका हजारवां भाग भी पूरा नहीं कर सका ! अगर स्वतंत्र जिंदा रह सकता तब इन्हें करने का अवसर मिलता और मैं अपनी हसरतें पूरी कर सकता !
इसके सिवाय मेरे मन में कभी कोई लालच फांसी से बचे रहने का नहीं आया ! मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कौन होगा ? आजकल मुझे खुद पर बहुत गर्व है ! अब तो बड़ी बेताबी से अंतिम परीक्षा का इंतजार है, कामना है कि यह और नजदीक हो जाए !!
आपका साथी,
" भगत सिंह ''
आज शहीदी दिवस है जिस दिन सरदार भगत सिंह,राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गयी थी ! शहीदों को नमन करते हुए राष्ट्रीय एकता को अखंड रखने का आप दृढ संकल्प लें ! आपको प्रेरित करे यह आखिरी चिट्ठी शहीद भगत सिंह जी की इसलिए इसको आपतक पहुंचाया गया इस वेब पोर्टल द्वारा !
त्योहारों और बहुत ही ज्यादा अनिवार्य सामाजिक दायित्वों में व्यस्त होने के कारण वेब पोर्टल मजबूरन पिछले दिनों अपडेट नहीं हो सका ! जैसा कि वादा किया था हमने फोन पर मित्रों से जो इससे जुड़े हैं 24 मार्च से अपडेट करेंगे, मगर हाजिर हैं आज से ही ..कल सुबह से खबरों की सुर्खिओं के साथ मिलेंगे फिर रात के दस बजे ..
प्रधान सम्पादक
- रंजन कुमार
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